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प्रदेश में कांग्रेस की सरकार कुप्रबंधन की सरकार, कर्जा लेने की हो गई आदत : गोविंद ठाकुर

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डेली हिमाचल न्यूज़ : मंडी
हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस की सरकार को कुप्रबंधन की सरकार बन गई है और उसे अब केंद्र सरकार से कर्ज लेने की भी आदत हो गई है। प्रदेश की कांग्रेस सरकार को चाहिए कि वह अपने आर्थिक संसाधनों को मजबूत करें और इस कर्ज लेने की आदत को खत्म करें। हिमाचल प्रदेश भाजपा के उपाध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री गोविंद ठाकुर ने कहा की अब एक बार फिर से कांग्रेस की सरकार ने केंद्र सरकार के समक्ष 1000 करोड़ रुपए का कर्ज लेने के लिए आवेदन किया है। लेकिन कांग्रेस सरकार की कर्ज लेने के लिमिट खत्म हो गई है। हर बात की एक लिमिट होती है और इसके बाद भी केंद्र की भाजपा सरकार लगातार प्रदेश कांग्रेस सरकार की मदद कर रही है। लेकिन कांग्रेस सरकार अपने संसाधनों को मजबूत नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा कांग्रेस सरकार के द्वारा अब एक बार फिर से विधायकों की विधायक निधि भी बंद कर दी गई है। जिससे कांग्रेस सरकार प्रदेश के विकास को रोक रही है। आर्थिक संकट के नाम पर विधायकों की निधि बंद करना करने का फैसला लेना गलत है और सरकार को चाहिए कि वह फिर से इस विधायक नीति को जारी करें। कांग्रेस ने जिस तरह से झूठ बोलकर सत्ता हासिल की और अब मुख्यमंत्री झूठ बोलकर सरकार चलाना चाहते हैं। लेकिन ऐसा नहीं हो सकता है उनका झूठ बेनकाब हो गया है और देश ने उनके झूठ को पूरी तरह से नकार दिया गया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पूर्व में विधायक निधि और विधायकों द्वारा बताए गए कामों को प्राथमिकता दिए जाने की बात करते थे और आज जब उन्हें खुद मौका मिला है तो वह विधायकों के हितों के ही विरोध में काम कर रहे हैं। पूर्व मंत्री गोविंद ठाकुर ने कहा कि विधायक निधि से हर विधायक अपने विधानसभा क्षेत्र में अति आवश्यक विकास कार्यों को करने के लिए धनराशि जारी करते थे। जिससे बहुत से जनहित के कार्य समय पर हो जाते थे और लोगों को राहत मिलती थी। सड़के, रिटेंशन वॉल, ब्रिज, जल निकासी, जैसे न जाने कितने विकास कार्यों को बिना लंबी काग़ज़ी प्रक्रिया के जनहित को देखते हुए तुरंत किया जा सकता है। लेकिन राज्य सरकार ने विधायक निधि को रोककर जनप्रतिनिधियों को विकास के कार्य करने से रोक रही है।
वही, एसपीयू मंडी का दायरा कम करने पर पूर्व मंत्री गोविंद ठाकुर ने सरकार को घेरते हुए का कि सरकार के इस गलत फैसले से पांच जिलों के विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ हो रहा है। प्रदेश की सुक्खू सरकार ने सरदार पटेल विश्वविद्यालय मंडी का दायरा घटाकर कांगड़ा, चंबा जिला सहित निरमंड और आनी के कॉलेजों को हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला से जोड़ दिया है। सरकार का यह फैसला सिर्फ स्टाफ की कमी का तर्क देकर नहीं लिया जा सकता है। दायरा कम किए जाने के बाद सरदार पटेल विश्वविद्यालय से संबद्ध सिर्फ मंडी, लाहौल स्पीति, और कुल्लू जिले रह गए हैं। एचपीयू के पास शिमला, सोलन, सिरमौर, हमीरपुर, ऊना, किन्नौर और बिलासपुर के कॉलेज रखे थे। अब फिर से एचपीयू का दायरा बढ़ाने से यहां काम का बोझ बढ़ गया है। प्रदेश सरकार सिर्फ बदले की राजनीति के चलते छात्र हितों की अनदेखा कर रही है। लेकिन भाजपा सरकार के इस गलत फैसले का विरोध करती है और प्रदेश के जनता के हितों के लिए आने वाले समय में आंदोलन भी किया जा सकता है।

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