
डेली हिमाचल न्यूज़ – मंडी (नितेश सैनी) : हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने मंगलवार को विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर मंडी जिला के सुंदरनगर स्थित दिव्य मानव ज्योति सेवा ट्रस्ट डैहर में स्वास्थ्य विभाग द्वारा आयोजित आयुष्मान आरोग्य शिविर का शुभारंभ किया। इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि राज्य सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वस्थ भारत के संकल्प के अनुरूप सभी नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण, सुलभ और समान स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में राज्य ने प्रमुख स्वास्थ्य संस्थानों में सुधार दर्ज किया है। मीडिया से बातचीत करते हुए राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने क्षय रोग (टीबी) की चुनौतियों पर कहा कि टीबी आज भी समाज में एक प्रमुख समस्या बनी हुई है, हालांकि राज्य इस बीमारी से निपटने में निरंतर प्रगति कर रहा है। उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश में टीबी के मामलों की संख्या वर्ष 2022 में 15,760 से घटकर वर्ष 2025 में 14,653 हो गई है, जो स्वास्थ्य कर्मियों के प्रयासों और समाज की सामूहिक भागीदारी को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि राज्य में उच्च जोखिम वाले लगभग 1.49 लाख व्यक्तियों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है। इनमें से लगभग 46 प्रतिशत लोगों की जांच एक्स-रे के माध्यम से की गई, जो राष्ट्रीय औसत से बेहतर है। शिविरों में आधुनिक हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीनों और उन्नत डायग्नोस्टिक सुविधाओं के जरिए निःशुल्क जांच की जा रही है, जबकि मोबाइल स्वास्थ्य इकाइयां दूरदराज और कठिन क्षेत्रों तक सेवाएं सुनिश्चित कर रही हैं। राज्यपाल ने कहा कि ‘टीबी-मुक्त ग्राम पंचायत’ पहल के तहत सामुदायिक प्रयासों से उत्साहजनक परिणाम सामने आए हैं। उन्होंने विशेष रूप से सरदार पटेल यूनिवर्सिटी मंडी द्वारा 75 टीबी रोगियों को गोद लेकर ‘निक्षय मित्र’ बनने की पहल सहरानीय और इसे समाज के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने समाज के सभी वर्गों से अपील की कि वे रोगियों के साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव न करें, बल्कि उनके सहयोगी बनकर इस लड़ाई में भागीदारी निभाएं। तकनीकी प्रगति का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि आधुनिक पोर्टेबल मशीनों के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाएं अब घर-घर तक पहुंच रही हैं, जिससे दूरदराज क्षेत्रों में जांच और उपचार और अधिक आसान हो गया है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में लगभग 7 लाख लोगों की जांच की जा चुकी है और टीबी की वृद्धि दर में कमी आई है। राज्यपाल ने विश्वास जताया कि सरकार के प्रयासों, आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं और जनता के सहयोग से हिमाचल प्रदेश जल्द ही टीबी-मुक्त राज्य बनने की दिशा में सफल होगा।
बता दे की हिमाचल प्रदेश की 3,615 ग्राम पंचायतों में से वर्ष 2023 में 731 (20 प्रतिशत), 2024 में 823 (23 प्रतिशत) और 2025 में 1,052 (29 प्रतिशत) पंचायतों को टीबी-मुक्त घोषित किया गया है। यह टीबी उन्मूलन की दिशा में एक सकारात्मक और प्रेरक कदम है। 100 दिवसीय विशेष अभियान के तहत राज्य में 5,176 उच्च जोखिम वाले गांवों और शहरी वार्डों की पहचान की गई है, जहां आयुष्मान आरोग्य शिविर आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि टीबी के मामलों की शीघ्र पहचान और समय पर उपचार सुनिश्चित किया जा सके। इस अवसर पर पूर्व सीपीएस सोहनलाल ठाकुर, उपायुक्त मंडी अपूर्व देवगन, एसपी विनोद कुमार, डीएसपी सुंदरनगर भारत भूषण, वन मंडल अधिकारी राकेश कटोच सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
Author: Daily Himachal News
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