Mandi News : बड़सु गांव के दीपक ठाकुर को पीएचडी की उपाधि, संघर्ष और संकल्प की बने मिसाल

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डेली हिमाचल न्यूज़ : मंडी : जिला मंडी के बल्ह उपमंडल के बड़सु गांव निवासी दीपक ठाकुर ने शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ से पीएचडी की उपाधि प्राप्त की है। चंडीगढ़ में आयोजित दीक्षांत समारोह के दौरान उन्हें यह प्रतिष्ठित उपाधि पंजाब के राज्यपाल द्वारा प्रदान की गई। दीपक ठाकुर की यह सफलता न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे क्षेत्र और युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।

दीपक ठाकुर स्वर्गीय जालम सिंह ठाकुर और माता हेमा ठाकुर के सुपुत्र हैं। पीएचडी की उपाधि प्राप्त कर उन्होंने अपने पिता का अधूरा सपना पूरा किया है। दीपक की शैक्षणिक यात्रा आसान नहीं रही, लेकिन दृढ़ निश्चय, निरंतर मेहनत और शिक्षा के प्रति समर्पण ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया। उनकी पंजाब यूनिवर्सिटी से जुड़ी यात्रा वर्ष 2004 में पहले बैच के छात्र के रूप में शुरू हुई। छात्र जीवन के दौरान वे छात्र राजनीति में भी सक्रिय रहे और उन्होंने छात्र से शोधार्थी तक का लंबा और प्रेरक सफर तय किया।

दीपक ठाकुर

उन्होंने वर्ष 2014 में स्नातकोत्तर (मास्टर्स) की पढ़ाई पूरी की, 2015 में राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (नेट) उत्तीर्ण की और 2016 में पीएचडी शोध कार्य की शुरुआत की। इसी दौरान उनकी शैक्षणिक क्षमता को देखते हुए उन्हें पंजाब यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में भी सेवाएं देने का अवसर मिला। शोध के दौरान उन्होंने विशेष रूप से अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग की महिलाओं की सामाजिक स्थिति पर गहन अध्ययन किया, जो समाज के लिए अत्यंत उपयोगी और प्रासंगिक विषय रहा। इसके साथ-साथ उन्होंने “लॉ ऑफ टॉर्ट्स” विषय पर एक पुस्तक भी लिखी, जो विधि के छात्रों और शिक्षकों के लिए महत्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ मानी जा रही है।

दीपक ठाकुर की इस उपलब्धि में उनके परिवार का भी विशेष योगदान रहा है। उनकी पत्नी निशा ठाकुर हिमाचल प्रदेश शिक्षा विभाग में प्रवक्ता (हिंदी) के पद पर कार्यरत हैं और उन्होंने हर कदम पर दीपक को प्रोत्साहित किया। आज दीपक की इस सफलता से बड़सु गांव सहित पूरे क्षेत्र में खुशी और गर्व का माहौल है।

दीपक ठाकुर की कहानी उन हजारों छात्रों के लिए संदेश है, जो सीमित संसाधनों और चुनौतियों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। उनका जीवन यह साबित करता है कि निरंतर परिश्रम, धैर्य और शिक्षा के प्रति समर्पण से किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। उनकी यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ी के छात्रों को उच्च शिक्षा और शोध के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए निश्चित रूप से प्रेरित करेगी।

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